Expression अभिव्यक्ति

अभिव्यक्ति

Expression

Expression

मानव हृदय मन: संस्थान चेतना में जब लहरें उठती हैं तो कोरे कागज पर अंकित होकर अभिव्यक्त होती है, गीत, गजल, भजन, मुशायरा, विचारों के रूप में प्रकट होती हैं । अभिव्यक्ति के बिना किसी मानव हृदय की उठनेवाली भाव-विचार को जानना असंभव होता है । विचार भाव अभिव्यक्त होने के लिए मचलती रहती है । विचारों को अभिव्यक्त करके ही स्थिति-परिस्थिति का सही पता चल पाता है । उपदेश अपनी अमृत वाणी से विचारों को अभिव्यक्त करके मन-मस्तिष्क में उपजने वाली कुविचारों को ध्वंस एवं सद्विचारों की स्थापना करने में समर्थता एवं सफलता हासिल पर पाता है । दुनिया में जितने भी महापुरुष हैं, वह अपनी गौरव-गरिमा की प्रतिष्ठा बनाने में सफल एवं सक्षम सशक्त विचारों को अभिव्यक्त करके ही हुए हैं । चेतना की गहराई में भावनाएं हर पल अटखेलियां खेलती रहती हैं और बिना अभिव्यक्त हुए चैन की सांस नहीं लेती हैं । जन-जन का कल्याण करने के लिए विचारों में ही समर्थ शक्ति निहित होती है, जो अभिव्यक्त होकर ही इरादे को पूर्ण करने में कामयाब होती है । अभिव्यक्ति विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए अपना पथ स्वयं बनाती हैं । जिस प्रकार से वर्षा के माध्यम से वृक्ष-वनस्पतियों को हरियाली मिलती है, ठीक उसी प्रकार हृदय की गहराइयों से निकलकर वाणी के माध्यम से अभिव्यक्ति शांति प्रदान करने में समर्थ होती है । विचारों के अभिव्यक्त करके ही सुसुप्त मानव मस्तिष्क की भाव चेतना को नव प्राण फूंककर सृजनात्मक क्रांति लाना संभव हो पाता हैै । अभिव्यक्ति के अभाव में विचार हृदया काश में सिमटी बिलखती रहती है । दृढ़ संकल्प हिम्मत से, प्रबल भावों एवं विचारों को उन्मुक्त गगन में उड़ते पंक्षी की भांति स्वतंत्र होकर इसे फैलना संभव हो पाता है । संत, विचारक संसार को अपना परिवार मानकर जन-जनके कल्याण के लिए अमृत विचार को अभिव्यक्त करने की सपना हृदय में संजाये रहते हैं । उसे जन मानस में विखेरते रहते हैं ताकि हमारी संस्कृति जीवंत एवं जागृत रहें । विचारों के बीज जन-जन के हृदय भूमि में बोकर उनकी जीवन की गौरव-गरिमा को विचारों की अभिव्यक्ति से पल्लवित, पुष्पित कर विशाल वट् वृक्षकी तरह महानता प्रदान करते रहते हैं । विचारों की अभिव्यक्ति के माध्यम से ही जीवन दर्शन प्रत्यक्ष रूप से जन-जन के समक्ष भला-बुरा प्रकट होता है । जिसको इतिहासविद् सिद्ध करते हैं । तबतक स्वयं का हृदय ही सत्यता की कसौटी पर निज जीवन को कसकर प्रखर प्रमाणित कर पाता है तथा अभिव्यक्ति से मार्गदर्शक बनकर जीवन को सुगंधित, आनंदित करने में सफल हो जाता है ।
लोक संवाद

पिता की सम्पत्ति में बेटी का अधिकार
महोदय,- पिता की सम्पत्ति में पुत्री के अधिकारकी बात से समाज में विखण्डन पैदा होगा । शादी के बाद पति की सम्पत्तिमें स्वाभाविक रूप से पत्नी अधिकारी बनती है । पुत्री पिता की सम्पत्ति पर बसने से ज्यादा वहां से सम्मान की अपेक्षा करती है । परन्तु वक्त के साथ परिवर्तन और तीसरा और चौथापनमें पुत्रपर निर्भरता पर पिता की सम्पत्ति में पुत्री का अधिकार की बात पर परि जनका वहां बस ने और पेट पाल नेके लिए खेती करने को नहीं, बल्कि सम्पत्ति बेचकर धन प्राप्त करने की शिकायत आज आम हो गयी है। यह परिवार के ढांचागत बनावट को खण्डित करती है । अपवाद स्वरूप आज भी उदाहरण है जब पिता की मृत्यु के उपरान्त भी पुत्रियां मायके में अपने भाई के घर को सम्भलने में सेतुका काम करती हैं और इन्हीं आया मोंका प्रतिफल रक्षा बन्धन का त्योहार आज भी जीवित है, वरना भाई-बहनके बीच सम्पत्ति विवाद इसे जमीन में गाड़ देता । इतिहास गवाह है कि पूर्वमें राजे-रजवाड़ों खूनी संघर्ष को टालने के लिए खूनी रिश्ता बनाया करते थे । किन्तु आज खूनी रिश्ता सम्पत्ति विवाद में दम तोड़ता प्रतीत होता है । -शत्रुघ्र सिंह, सोनपुर, सारण ।
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