Why do people succeed and fail

Why do people succeed and fail

सफल और असफल क्यों होते हैं लोग ?

Why do people succeed and fail?

सफलता क्या है जो हर कोई सफल होना चाहता है |

Why do people succeed and fail?

Why do people succeed and fail :- सफलता एक सीढ़ी नुमा रास्ता है, जिसे एक-एक कर के पार किया जाता है जो हर कोई करता है और उसमें से कुछ लोग सफल भी होते हैं | पर हर कोई सफल क्यों नहीं हो पाता ? जबकि वह भी उसी रास्ते से होकर गुजरता है फिर भी सफल नहीं हो पाता | इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, पर मैं एक ही कारण के बारे में बात करना पसंद करूंगा वह है हमारी ‘सोच’ जिसकी वजह से हम सफल या असफल होते हैं |

सफलता कोई फल नहीं है, जिसको आसानी से तोड़ लिया जाए सफलता निरंतर प्रयास करने का परिणाम है | जो हर कोई नहीं करता कुछ दूर जाने के बाद थक जाता है | जिसके कारण वह सफल नहीं हो पाता पर इन सब बातों के पीछे हमारी ‘सोच’ बहुत हद तक निर्भर करती है कि हम किस तरह सोचते हैं और क्या सोचते हैं ? क्योंकि हम अपनी ‘सोच’ की वजह से ही सफल और असफल होते हैं |

इन सब बातों में दो बातें साफ हो जाती है |

1.     1. हमारा दिल क्या चाहता है, और

2.    2. हमारा मस्तिष्क क्या सोचता है |

अब आप कहेंगे कि हमारे दिल और मस्तिष्क का इस सफलता से क्या कनेक्शन है, तो आप इस बातों में ज़रा गौर कीजिए |

1.     हमारा दिमाग किसी बातों को सोचता है और वही बात हमारे दिल तक पहुंचती है,  और

2.     हमारा दिल उसका जवाब हँ या ना में देता है |

हम क्या चाहते हैं यह तो हमारा दिल ही जानता है पर क्या दिल के चाहने से सफलता हासिल हो जाती है अगर यह बात सही है, तो मैं यही कहना चाहूंगा कि हँ हमारे दिल के चाहने से सफलता हासिल हो जाती है, क्योंकि हमारे अंदर प्रेरणा का स्रोत हमारे दिल से शुरू होकर हमारे मस्तिष्क तक पहुंचता है और मस्तिष्क उसका विश्लेषण करता है, तब जाकर हम किसी कार्य को करने में सक्षम होते हैं |

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आपने देखा होगा की जब दिल और दिमाग दोनों में लड़ाई होती है, तो हमेशा दिल ही जीतता है क्योंकि जब कोई बात हमारे दिमाग में आती है, तो दिल उसका जवाब हँ या ना में देता है और हमारे दिल के अंदर मीठी-मीठी दर्द सी महसूस होती है और यह महसूस दो तरह की हो सकती है एक तो यह क्या हम इस काम को करें या नहीं और दूसरी यह कि अगर हम इस काम को करते हैं तो इसका क्या परिणाम क्या होगा | क्योंकि दिल हमेशा आपके अंदर आप की प्रेरणा के अनुसार ही कार्य करता है और दिमाग सिर्फ उन चीजों के बारे में सोचता है जो आपकी चाहत है पर दिल यह कहता है कि क्या इस चाहत को अब पूरा कर पाएंगे या नहीं यह हमारा दिल हमें पहले ही आगाह कर देता है | क्योंकि दिल और दिमाग दोनों का चोली दामन का साथ है | वह एक दूसरे के बिना कभी रह नहीं सकते | कभी आप इन बातों को गौर करके देखिए कि क्या आपने जो कार्य किया उसने दिल का कोई साथ नहीं था कि आपके दिमाग ने कभी साथ नहीं दिया | आप अकेले सिर्फ दिल से या फिर दिमाग से किसी कार्य को करने में सक्षम नहीं हो सकते |

इन सब बातों को देखने के बाद यह लगता है कि हमारी सफलता हमारी ‘सोच’ के ऊपर बहुत हद तक निर्भर करती है | हम जैसा सोचते हैं वैसा पाते हैं अगर हमने सोच लिया कि हम इस काम को नहीं कर सकते तो हम कभी नहीं कर सकते अगर हमने सोच लिया इस काम को हम कर सकते हैं, तो हम कर सकते हैं |

जब आप किसी वस्तु को या किसी चीज को दिल से पाना चाहते हैं तो उसके लिए आप हर तरह के प्रयास करते हैं और आपके साथ आपका दिमाग भी आपका साथ देता है और वह हर कदम आपके साथ होता है | अगर कोई आपसे यह कहें कि तुम यह काम छोड़कर दूसरे कामों को करो तो जल्दी सफल हो जाओगे पर आपका दिल नहीं मानता | आप उन कामों को नहीं करना चाहते हैं क्यों, क्योंकि आपकी आपका दिल इसकी मंजूरी नहीं देता है | क्योंकि, हमारी सफलता का राज इसी रास्ते में छुपा हुआ है और आप हमेशा उसी रास्ते से होकर गुजरते हैं और एक दिन सफल हो जाते है |

https://www.youtube.com/watch?v=nIGOXR0FgcM

सफलता के बारे में कुछ बातें इस प्रकार है जो निरंतर अमल में लाने पर आप सही में सफल हो जाएंगे |

1.   निरंतर :- निरंतर से तात्पर्य है की सफलता कोई लक्ष्य नहीं है, बल्कि एक सफर है | जिस सफर में हम आगे चलते रहते हैं | एक सफलता हासिल करने के बाद दूसरी सफलता की ओर अपने कदम को बढ़ाते जाते हैं | क्योंकि एक लक्ष्य पूरा होने के बाद हम दूसरी लक्ष्य की ओर बढ़ते चले जाते हैं और यह सिलसिला जन्म से लेकर मृत्यु तक निरंतर चलते रहता है |

2.  अनुभूति :- अनुभूति का अर्थ है की अनुभव करना हमें सफलता बाहरी चीजों से नहीं मिलती है | बल्कि वह हमारे अंदर की प्रेरणा होती है | वह हमारे अंदर महसूस होता है क्योंकि बाहरी अनुभव जो होते हैं वह अंदरूनी अनुभव के बजाय खोखले होते हैं | हम दूसरों से प्रेरित होते हैं पर अनुभव हमारा ही काम आता है |

3.     सार्थकता :- सार्थकता का संबंध हमारी मूल्य प्रणाली से हैं | मूल्य रहित लक्ष्य सार्थक नहीं हो सकते हम किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं सकारात्मक लक्ष्य की दिशा में या नकारात्मक लक्ष्य की दिशा में | सार्थकता से हमारी सफल का स्तर यानी उसकी गुणवत्ता पर होती है | इसी से हमारी सफल को एक अर्थ मिलता है और हमें आत्मसंतुष्टि होती है | लक्ष्मण पूर्ण है क्योंकि उनके कारण हमें अपनी दिशा का एहसास होता है |

धन्यवाद, दोस्तों हमारा यह आर्टिकल्स आपको पसंद आया होगा या नहीं यह तो हम नहीं जानते पर सफल होने के लिए आपको निरंतर प्रयास करते रहना होगा | क्योंकि यही एक रास्ता है जिसकी वजह से हम सफल हो पाते हैं | अपने कामों को निरंतर करते रहिए और उससे अनुभव लेते रहिए जहाँ गलतियाँ हो उनसे कुछ सीखिए और उस गलतियों को दोबारा ना दोहराइए है | यही सफलता का मूल मंत्र है | फिर मिलते हैं, हम अगले आर्टिकल्स में तब तक के लिए मैं आपसे विदा चाहता हूं जय हिंद जय भारत |

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