सहनशीलता से अपने जीवन से सुधार लाये Improve your life with tolerance

सहनशीलता से अपने जीवन से सुधार लाये

Improve your life with tolerance

मानव अपने जीवन में हर कार्य को जल्दी करने का प्रयास करता है । मनुष्य बुद्धिजीवी होने साथ-साथ अज्ञानी भी है । आपने देखा होगा की बहुत से लोग जब ट्राफिक में फंस जाने के बाद उनके अन्दर बैचेनी सी हो जाती है यही नहीं वे किसी भी रास्ते जाने को तैयार हो जाते है । घर में अगर कोई महिला खाना परोसने में थोड़ा देरी कर दे तो गुस्से से भर जाते है । जीवन के हर पल में उनको बैचेनी सी छई रहती है । इसी बैचेनी में वे कुछ गलत कर देते है । इस तरह के स्थितिया हमारे दैनिक जीवन में हर पल घटित होती रहती है । इन परस्थितियो को सुधार करना होगा पर ये काम एक दिन में तो संभव नहीं है । इस प्रकार की स्थिति जीवन शांति को भंग तो नहीं करती पर मन में अशांति जरुर फ़ैल जाती है । जिसके कारण हमारा दैनिक जीवन अशांतियों से भर जाता है । हम कुछ अच्छा करने के बजाय बुरा कर बैठते है । सबसे पहले तो हमे संयम के महत्व को समझना होगा फिर उसके बाद अपने दैनिक जीवन में व्यक्तिगत तरीके से अपनाना होगा । हम जैसे-जैसे संयम के महत्व को समझते जाएगे हमारे व्यक्तिगत जीवन में सुधार होने लगेगा ।

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धैर्य और सहनशीलता मानव जीवन के दो गुण हैं, जो अक्सर मनुष्य के बस में हैं । धैर्य का अर्थ मानव के दैनिक जीवन में घटित होने वाली परिस्थितियों को सहन करना है । हमारे दैनिक जीवन में हर तरह के घटना अक्सार होती रहती है जैसे – लोगों को बातों सहन करना, अपने आस – पास हो रही घटनाओं को साहन करना , समय की धीमी गति को सहन करना आदि । सहिष्णुता का अर्थ है, स्वीकृति का एक बड़ा अंश होना । धैर्य सहनशीलता की ओर जाता है, सहिष्णुता स्वीकृति की ओर ले जाती है और स्वीकृति शांति, आनंद और सद्भाव की ओर ले जाती है ।मनुष्य अपने आप को अधीर क्यों समझाता है जबकि पेड़ – पौध, पहाड़, नदी,झरने सूर्य चंद्रमाआदि कभी अधीर नहीं है । मनुष्य हमेशा अधीर क्यों रहता है । वह जीवन के हर समय त्वरित गति से क्यों चलता है ? आखिरकार उसे इस जीवन से क्या चाहिए जो उसे नह्गी मिल पा रहा है ।

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मानव अपने जीवन में तेजी से बदलाव चाहता है पर ये कैसे संभव हो सकता है । जब प्रकृति को बदले में समय लगता है, रात से दिन होने से समय लगता है एक जगह से दुसरे जगह जाने ने समय लगता है । जिस तरह से एक बच्चा अपने माँ के गर्भ में कुछ समय गुजरने के बाद इस सुहानी पृथ्वी पर कदम रखता है तो मानव को भी बदलने में भी समय का इंतजार करना होगा । दुनिया के सभी जानवरों में से मनुष्य को भगवान ने बुद्धिजीवी बनाया है जो हर कार्य को करने से पहले सही और गलत बातों का ध्यान रखे सके । प्रत्येक मनुष्य यह जनता है की हमे प्रकृति से हवा, पानी मिट्टी आदि मिल सकती है पर समय नहीं मिल सकता है । आपने सामने बैठा व्यक्ति कब मृत्यु को गले लग जाएगा ये कोई नहीं जनता है । इस धरती पर रहने वाले हर जीव अपना भविष्य नही जानते की एक पल में उनके साथ क्या होगा । इन्ही सब बातों को ध्यान में रख के अपने जीवन में संयम, धैर्य और सहनशीलता लाकर अपने जीवन को सुख शांति के साथ जीवन का आनंद ले और सभी को आनंद प्रदान करे यही मनुष्य जीवन का लाभा है ।